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पटना के कायस्थ छात्रों को जातीय नेताओं से आदि मंदिर या पूजा समीतियो की जबानी जंग नहीं कुछ और चाहए, अपनी नेतागिरी का तरीका बदले कायस्थ नेता

कायस्थ खबर डेस्क I कायस्थ समाज से एक लोकसभा सांसद, २ राज्य सभा सांसद, ३ विधायक , २ एम् एल सी और सैकड़ो कायस्थ संगठनो  वाले बिहार की राजधानी पटना की राजनीती में कायस्थ क्यूँ हाशिये पर रहते है I इसका कारण बिहार में कोई नहीं बताना चाहता है I ६ महीने बाद लोकसभा  और उसके बाद विधान सभा चुनावों की आहट से ही पटना के कायस्थों में राजनैतिक सर्गारिमियां बढ़ गयी है I तमाम आरोप प्रत्यारोप एक दुसरे पर उछलने का दौर शुरू हो चुका है I आपसी विरोध अब नफरत में बदलता दिख रहा है I राजनैतिक छीटाकशी अब व्यक्तिगत छिछले पन पर आने लगी है I एक दुसरे पर आरोपों का हाल ये है की कोई ऐसा काम नहीं बचा है जिसमे राजनीती नहीं दिख रही है I यहाँ तक की इस बार होने वाली  भगवान् चित्रगुप्त की पूजा और उसके बाद होने वाले विसर्जन को लेकर भी नयी राजनीती शुरू हो गयी है I कल तक जो प्रसाद पा रहे थे आज कहीं और से प्रसाद पाकर उन्ही के खिलाफ सामाजिक मर्यादाओ के ख़तम करने के रोज नए रिकार्ड बना रहे है I स्थापित गुट के खिलाफ स्थापित होने की चाह रखने वाले नेता नए पैतरे आजमाने में लगे है I सोशल मीडिया के कुछ ग्रुपों में लोगो ने शब्दों की मर्यादाये लांघनी शुरू कर दी है , सब दुसरे से सवाल तो पूछने में तो लगे है लेकिन कोई ये नहीं बता रहा है की आखिर उन्होंने समाज को अब तक क्या दिया I

ऐसे कल बिहार से एक युवा छात्र नेता ने फोन किया तो समझ आया की मात्र सत्ता की पहुँच को ही सफलता मानने में लगे नेताओं का आम कायस्थ से कितना कनेक्शन है I बिहार ने एक छात्र ने अपने साथियो के साथ भेजे मेल में अपनी व्यथा बताते हुए है की पटना में शत्रुघ्न सिन्हा से लेकर  रविशंकर प्रसाद तक और नितिन नवीन से लेकर  अरुण सिन्हा ,  विनय वर्मा  और संजय मयूख से रणवीर नंदन तक, साथ ही राजीव रंजन, डा अजय आलोक,अजय वर्मा, और इन सबसे अलग आर के सिन्हा तक सबने अपने अपने हिसाब से राजनीति तो करी है I लेकिन आज तक पटना में कायस्थ समाज के युवाओं के लिए छात्रावास तक नहीं बनवा सके है I इन लोगो को आदि मंदिर की राजनीती में तो मजा आता है लेकिन बच्चो की शिक्षा के मंदिर की राजनीती के लिए समय नहीं है I काश की आदि मंदिर के पास ही कोई छात्रावास जैसी सुविधा के बारे में भी इन्होने सोचा होता I

हालांकि आर के सिन्हा इन सबसे अलग अपने खुद के पैसे से कायस्थ समाज के लोगो की बहुत मदद करते दीखते हैं,  लेकिन वो भी कायस्थ बच्चो के लिए छात्रावास जैसी कोई सुविधा नहीं करवा पाए I असल में गरीब कायस्थों की असली समस्याओ तक कोई पहुँच ही नहीं पाता है I शत्रुघ्न सिन्हा जैसे कायस्थ नेता ५ साल में एक बार कायस्थों को दर्शन देने आते है I कायस्थों को छात्रावास या ऐसा ही कुछ देने की बजाय उन पर गर्व करने की बात कह कर वोट देने की बात करके चले जाते है

कायस्थ युवाओं के इस पत्र को पढ़ कर एक बात समझ आयी की आज इन स्थापित सांसदों, बिधायको एमएलसी से आखिर कायस्थ समाज को क्या फायदा है क्योंकि समाज के युवाओं की शिक्षा के लिए ही अगर हमारे नेता कुछ नहीं कर सकते है तो खाली मदिर की राजनीती और या कलम दवात की पूजा करने वाले नेताओं के बलबूते कायस्थ युवा क्या करेगा ?

सभी चुनाव के समय बड़ी बड़ी घोषणा करते है । कायस्थ समाज के लिए बहुत कुछ करेंगे । । मगर चुनाव खत्म होते ही छात्रावास या कोई मदद की बात हो तो सुनते नही । कायस्थ समाज को सिर्फ दुख ही मिलता आ रहा है  बिहार में कायस्थ छात्रों की इस मांग से जहाँ पटना के कायस्थ समाज के नेताओं की राजनीती और सोच का पता चलता है वहीं आपस में लड़ते इन नेताओं पर एक सवाल भी खड़ा होता है की आखिर कब तक कायस्थ समाज जाती के नाम पर इन बड़े नेताओं को जिताने के लिए बस वोट बैंक बना रहे I कब ये नेता समाज के छात्रों के लिए भी कोई काम करेंगे ?

पटना के कायस्थ छात्रों के सभी पुराने और  राजनीती करने का मन बना रहे है नए नेताओं से एक ही अपील की है की लोकसभा चुनाव से पहले कायस्थ छात्रावास का निर्माण हर हाल मे हो । साथ ही कायस्थ समाज के संस्थाओ को एक होकर काम करने की सलाह भी दी , ताकि कोई कायस्थ को कमजोर ना कहे । कोई भी संस्था आपस मे एक दूसरे की बुराई ना करे । कोई भी बात हो तो आपस मे मिलकर इसका निदान करे । सोशल मीडीया पे आपस मे बुराई करना बंद करें।

पटना से अविनाश वर्मा, आदित्य श्रीवास्तव , ऋतिक श्रीवास्तव ,हिमांशु श्रीवास्तव , आकाश श्रीवास्तव , आकाश सिन्हा , प्रियांशु श्रीवास्तव , राज सिन्हा , आलोक सिन्हा , सत्यम सिन्हा , पर्तीमेश कर्ण , सोनू सिन्हा , रौशन वर्मा , उज्जवल सिन्हा , नीरज श्रीवास्तव , सौम्या सिन्हा , अंकिता सिन्हा , गुंजन श्रीवास्तव , रचना श्रीवास्तव , निशा सिन्हा , निहारिका वर्मा , मोनिका कर्ण , निधि श्रीवास्तव , आरोही श्रीवास्तव  जैसे सभी  बिहार के कायस्थ नौजवान छात्र है जो अब कायस्थ समाज इन नेताओं से अपनी बातें कहना चाहते है ना की उनकी आपसी लड़ाई को सुनना चाहते है अगर आप भी इन छात्रों से सहमत है तो इस खबर को #KayasthaPatnaPolitics हैश टैग के साथ शेयर कीजिये ताकि समाज ने नेताओं को युवाओं की मांग भी समझ आ सके

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