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कायस्थ पाठशाला : इतिहास एवं विकास (चतुर्थ भाग ) – टीपी सिंह की नजर से, बिहार की तमाम सम्पत्तिया हजारों बैनामो के द्वारा चौधरी परिवार के वारिसो ने बेच दी और सारे न्यासी बन्धु शान्त बैठै रहे।

मेरे महामंत्री एवं अध्यक्षीय काल मे कायस्थ पाठशाला मुख्यालय मे उपलब्ध अभिलेखो के आधार पर मै निम्न आख्या दे रहा हूँ।और इससे सम्बंधित यदि किसी को साक्ष्य देखना हो तो वह मेरे पास उपलब्ध हैं और यदि कोई त्रुटि हो तो उसका स्वागत है। जिससे कि आख्या मे उचित सशोंधन किया जा सके।

टीपी सिंह (तेज प्रताप सिंह ) 

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चतुर्थ चरण

1÷उक्त से यह स्पष्ट है कि चौधरी महादेव प्रसाद जी की यह मंशा थी कि उनके नवासो को रहने के लिये खुशहाल पर्वत मे स्थित उनकी कोठी वह भी इस शर्त के साथ उसमे कोई बाहरी व्यक्ति तीन दिन से ज्यादा न रूक सकेगा और किसी भी हालत मे किसी बाहरी व्यक्ति को किराये पर नही रक्खा जायेगा तथा इसी परिप्रेक्ष्य मे यह भी लिखा की उक्त कोठी की रिहायशी नवईययत नही बदली जायेगी और यदि रिहायशी सुविधा के लिये अधिकृतों लोगो को कोई आवश्यकता पडती है तो वह अपने खर्चे से तामीरात करा सकते है ।जहाँ तक नानपुर मे उनके रिहायशी कोठी और बनारस मे शिवाला जहा उन्होंने अतिंम सांस ली और अक्षुण्य रखने की जिम्मेदारी ट्रस्टीयान । बनारस का शिवाला उनकी मंशा बिरादरी के जो व्यक्ति बनारस जाये उसके रिहायश के लिए थी परन्तु दुर्भाग्य की बात है।

बिहार में नानपुर मे स्थित कोठी का प्रश्न है , उसके अवशेष मिलना मुश्किल हैऔर बनारस मे स्थित शिवाला चौधरी अमरनाथ सिंह के पुत्र चौधरी बी•एन•सिंह उर्फ बालाजी को रूपये 150/- मात्र पर किराए पर दिया गया जबकि उसमे स्थित दुकानो से श्री बाला जी 40000 (चालीस हजार )रूपये से उपर किराया वसूल कर व्यक्तिगत इस्तेमाल कर रहे है। और कायस्थ पाठशाला पच्चीसो हजार रूपया वर्ष भर भर मे मरम्मत के नाम पर खर्च कर रही है । कल्याणी गार्डेन जो कायस्थ पाठशाला के नाम सदियों से राजस्व अभिलेख मे मुद्रित था,को कटवा कर चौधरी जितेन्द्र नाथ सिंह ने लगभग चार विवाह घर आदि बनवाकर,गैर रिहायशी उपयोग मे लाकर बाहरी लोगो को किराए पर उठाकर लाखो रूपये अर्जीत कर रहे है।कायस्थ पाठशाला का नाम कटवाकर विवाह-घर के नाम से राजस्व अभिलेख मे दर्ज कराने पर जब मैने (T.P.SINGH)आपत्ति की तो उत्तर मे चौधरी जितेन्द्र नाथ सिंह ने यह कहा कि यह गलती से हो गया है।

2÷ चौधरी साहब ने अपनी सम्पत्ति की आय को दो भागों मे बांटा एक भाग उनके नामित लोगो को देने का प्रावधान किया, इस परिप्रेक्ष्य मे पैरा 17 मे कहा कि: "बाद इन मसारिफ के बाकि मुनाफे की दो हिस्सा मसादी की जायेगी।" तथा दूसरे भाग को पैरा 18 मे दी गई व्यवस्था के अनुसार देने प्रावधान किया ।

पैरा 19 मे कहा कि-

"निस्फ दोयम मुनाफा मजकूरा बाला व रकम जो हसब हिदायत शमिल निस्फ दोयम हाजा हो वह कुल रकम वाद पस अन्दाज किये जाने विस्तुम हिस्सा के जो बतौर रिजर्व फंड के हमेशा बढ़ता रहेगा।हसब जैल अमुरात मे सर्फ हुआ करेगा।" उनके द्वारा दी गई उक्त दितीय भाग एक रिजर्व फडं के रूप मे रहना था और केवल विकास कार्यो मे खर्च होना था परन्तु दुर्भाग्य का विषय है कि आय का दितीय भाग कहा जा रहा है इसका पता नही है और न ही इसका कोई विवरण कायस्थ पाठशाला कार्यालय मे है।

3÷ आप महानुभाव मुशी काली प्रसाद जी द्वारा बनाये ट्रस्ट के सम्मानित न्यासी है और उसी हैसियत से कायस्थ पाठशाला प्रयाग जो एक पंजीकृत सोसायटी है के सदस्य है। एक ट्रस्टी का दायित्व कि महानुभाव द्वारा बनाये ट्रस्ट की सुरक्षा करे और ट्रस्ट के रख रखाव को सुनिश्चित करे।

"मै आज कायस्थ पाठशाला न्यास के उन सम्मानित न्यासीयो से प्रश्न पुछना चाहता हु कि स्पष्ट मुमानियत होने के बाद भी चौधरी महादेव प्रसाद जी द्वारा दान की गयी बिहार की सम्पत्ति की सुरक्षा का न्यासियो ने क्या प्रयास किया? सीतामढी मे जो चौधरी साहब की कोठी थी,उसके अवशेष आज मिलना मुश्किल है ।जबकि चौधरी साहब ने स्पष्ट रूप से व्यवस्था की थी उसको सुरक्षित रक्खा जाये। बिहार की तमाम सम्पत्तिया हजारों बैनामो के द्वारा चौधरी परिवार के वारिसो ने बेच दी और सारे न्यासी बन्धु शान्त बैठै रहे।

इलाहाबाद की मे स्थित चौधरी साहब की कोठी की तमाम किरायेदार रक्खे गये और चौधरी गार्डन को व्यवसायिक स्थल मे तब्दील कर दिया गया जिससे लाखो का किराया प्रतिमाह वसूला जा रहा है और चौधरी परिवार के लोग उसका भोग कर रहे है। कहा है वो धारा 19 मे वर्णित जो दूसरे हिस्से मे रिजर्व फण्ड के रूप मे रखना था ? और जिसका प्रयोग कायस्थ पाठशाला की सम्पत्तियो के उत्थान के लिये उपयोग करना था । ?निवेदन÷ लोग सो रहे है पर मैंने कायस्थ पाठशाला ट्रस्ट की विभिन्न सम्पत्तियो को जो चौधरी साहब ने गलत रूप मे बेचा है,उसके विक्रय धन को कायस्थ पाठशाला मे वापस लाने का और चौधरी गार्डन से अर्जित आय को कायस्थ पाठशाला के खाते मे जमा करने का बीड़ा उठाया और इस परिप्रेक्ष्य मे जिला न्यायालय एव उच्च न्यायालय मे विभिन्न वाद दाखिल किये है और उनमे मेरा प्रण है कि इसको वापस लाकर रहूँगा।

कायस्थ पाठशाला के इतिहास के संदर्भ में पूर्व अध्यक्ष तेज प्रताप सिंह के लिखे जानकारी को कायस्थ खबर यथास्थिति में प्रकाशित कर रहा है I किसी भी ऐतिहासिक जानकारी के लिए सही या गलत के लिए कायस्थ खबर ज़िम्मेदार नहीं है I

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