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ब्रेकिंग न्यूज : कार्यवाहक अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद का अभाकाम से इस्तीफा, अगले २ दिनों में राष्ट्रीय अध्यक्ष सुबोध कांत सहाय कर सकते है स्वीकार

कायस्थ खबर ने कई दिन पहले ही अपने पाठकों को आगाह किया था कि अखिल भारतीय कायस्थ महासभा में सब कुछ सही नहीं चल रहा है और इसको लेकर चल रहे आंतरिक उठापटक के बाद एक परिणाम सामने आ गया है अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के अब तक रहे राष्ट्रीय कार्यवाहक अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद ने सोशल मीडिया पर घोषणा की कि वह अपने पद से इस्तीफा दे रहे हैं राजीव रंजन की इस घोषणा के बाद अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के सूत्रों से जानकारी मिली है कि आने वाले 2 दिनों में उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया जाएगा सूत्रों के अनुसार जब उन्होंने पहले इस्तीफा दिया था तो राष्ट्रीय अध्यक्ष सुबोध कांत सहाय ने इस्तीफे को अस्वीकार कर दिया था लेकिन सुबोध कांत सहाय के अस्वीकार करने पर राजीव रंजन प्रसाद ने वह इस्तीफा सार्वजनिक कर दिया जिसके बाद उनकी जगह नए राष्ट्रीय कार्यवाहक अध्यक्ष को लाने की तैयारी शुरू कर दी गई है

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क्या जल्दीबाजी में उठा गए हैं कदम राजीव रंजन ?

कायस्थ महासभा की राजनीति को बारीकी से समझने वाले चिंतकों ने राजीव रंजन के इस्तीफे को दबाव की राजनीति बनाने के लिए जल्दबाजी में उठाया कदम बताया है महासभा के सूत्रों की भी माने तो अब तक राजीव रंजन तीन से चार बार इस्तीफा दे चुके थे और हर बार उन्हें मना लिया जाता था लेकिन इस बार अध्यक्ष सुबोध कांत सहाय से मनमुटाव की खबरें बाहर आई बताया जा रहा है कि भगवान चित्रगुप्त के अपमान के मुद्दे पर कपिल शर्मा द्वारा सुबोध कांत सहाय को टैग किया जाना और राजीव रंजन प्रसाद को टैग ना करना इस विवाद की जड़ है महासभा में इसको लेकर तमाम उठापटक हुई और अंततः राजीव रंजन ने इस बात का ऐलान कर दिया कि जल्द ही वह अखिल भारतीय कायस्थ महासभा से जुड़ा ऐलान करेंगे। लेकिन जानकार मानते हैं कि राजीव रंजन भावनात्मक तौर पर यह फैसला लेकर जल्दबाजी कर गए हैं आने वाले कुछ महीनों में बिहार में चुनाव है ऐसे में बिहार विधानसभा चुनाव में दीघा से चुनाव लड़ने की इच्छा रखने वाले राजीव रंजन के लिए महासभा से इस्तीफा देकर सुबोध कांत सहाय से नाराजगी लेना शुभ संकेत नहीं है आपको बता दें कि बिहार में अखिल भारतीय महासभा के दो ही गुट मजबूती से कार्य करते हैं एक सुबोध कांत सहाय ग्रुप जिसमें राजीव रंजन कार्यवाहक अध्यक्ष रहे हैं और दूसरा रविनंदन सहाय  गुट हैं , पहले सोचा जा रहा था कि राजीव रंजन, रविनंदन सहाय गुट से मिल सकते हैं लेकिन दिल्ली के एक नवोदित संस्था में अपनी धर्मपत्नी को कार्यवाहक अध्यक्ष बनाने के फैसले ने इस एंगल पर भी रोक लगा दी है ऐसे में राजीव रंजन प्रसाद का अगला कदम क्या होगा यह आने वाले दिनों में पता लगेगा अखिल भारतीय कायस्थ महासभा पर इसके क्या परिणाम होंगे यह भी आने वाला समय ही बताएगा

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