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भाई की लाश के साथ इसी घर में रहे प्रह्लाद भटनागर फोटो क्रेडिट : अमरउजाला

कायस्थ समाज में विवाह और एकाकीपन की समस्या, छोटे भाई की लाश के साथ रहते रहे प्रहलाद भटनागर , छोटे भाई की मौत को नहीं कर रहे थे स्वीकार. कायस्थ समाज में संगठन बने सफ़ेद हाथी , जानकारी भी नहीं

कायस्थ खबर डेस्क I कायस्थ समाज में संगठनों की भरमार है , राष्ट्रीय , अन्तराष्ट्रीय जैसे कई संगठन समाज में अपनी उपस्थिति के नित नए आयाम स्थापित करने के दावे कर रहे है I ऐसे भी लोग हैं जिन्होंने मेडिकल हेल्प करने का समाज  में अपना खूब गाना गा लिया है लेकिन इन सब के बाबजूद राजधानी दिल्ली की दौड़ती लाइफ में समाज के लोग एकांकीपन का शिकार हो रहे हैं। ऐसे ही मामले में करावल नगर इलाके में दिल झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहां मानसिक रूप से बीमार 70 साल के एक भाई ने 68 साल के भाई की मौत के बाद उसके शव के साथ नौ दिन बिताए।
कायस्थ खबर को मिली जानकारी के मुताबिक़ दिल्ली के करावल नगर में रहने वाले प्रह्लाद भटनागर (70) अपने छोटे भाई राजेंद्र भटनागर (68) की मौत को स्वीकार करने को तैयार ही नहीं हुये । वह उसके साथ सोता रहे , शव बुरी तरह सड़ गया, यहां तक उसमें कीड़े भी पड़ गए। राजेंद्र के स्कूल से उसके साथी उसकी खेर-खबर लेने आए तो उसकी मौत का पता चला। मामले की सूचना मिलते ही शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। फिलहाल राजेंद्र के बाकी परिवार से संपर्क नहीं हो सका है। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर पड़ोसियों व प्रह्लाद की मौजूदगी में उसका अंतिम संस्कार करा दिया। अब करावल नगर थाना पुलिस मामले की छानबीन कर रही है। क्या है अविवाहित भाइयो की कहानी 
पुलिस के मुताबिक प्रह्लाद और राजेंद्र अकेले ही ए-238, गली नंबर-2, रामा गार्डन करावल नगर में रहते थे। राजेंद्र ने एक निजी कंपनी से रिटायर होने के बाद इलाके के लिटिल स्टॉर पब्लिक स्कूल में संस्कृत पढ़ाना शुरू कर दिया था। स्कूल से मिलने वाली सैलरी से दोनों भाई अपना गुजारा कर रहे थे। दोनों ही खाना बनाकर खुद खाते थे इनके परिवार में एक बड़ा भाई बीकानेर व बहन झांसी में रहती थी। फिलहाल दोनों का राजेंद्र व प्रह्लाद से संपर्क नहीं था। इधर प्रह्लाद व राजेंद्र अविवाहित थे। पड़ोसियों का कहना है कि अकेले रहने के कारण दोनों एकांकीपन का शिकार हो गए थे। गत 23 जून को राजेंद्र की तबीयत बिगड़ी तो वह दवाई खाकर सो गया।इसके बाद वह नहीं उठा। प्रह्लाद ने उसी दिन शाम को, फिर अगले दिन उठाया, लेकिन राजेंद्र नहीं उठा। प्रह्लाद ने सोचा शायद राजेंद्र की तबीयत ज्यादा खराब है।
प्रह्लाद खुद खाना बनाकर मरे हुए भाई के साथ सोते रहे । भाई का शव सडने लगा, लेकिन उसने किसी को सूचना नहीं दी। इधर गर्मियों की छुट्टियों के बाद 27 जून को राजेंद्र का स्कूल खुल गया। स्कूल न जाने पर 28 जून को स्कूल का चपरासी कुछ चाबियां जो राजेंद्र के पास थी उनके घर लेने पहुंचा और उसने प्रह्लाद से राजेंद्र के बारे में पूछा। प्रह्लाद ने उससे राजेंद्र के बीकानेर जाने की बात की। इधर दुबारा एक जुलाई को चपरासी दुबारा गया, उसे यह ही जवाब मिला। इधर स्कूल के प्रिंसिपल लक्ष्मीचंद तोमर ने सोमवार को स्कूल के दो शिक्षक नंद कुमार व उत्तम कुमार को घर भेजा।
दरवाजा खटखटाने पर जैसे ही प्रह्लाद ने दरवाजा खोला, दोनों टीचर को कुछ दुर्गंध आई। जैसे ही दोनों अंदर घुसे उनको सामने बैड पर बुरी तरह सड़ा-गला शव पड़ा मिला। दोनों शिक्षकों ने बाहर निकलकर शोर मचा दिया। घर के बाहर लोगों की भारी भीड़ इकट्ठा हो गई। मामले की सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। कहाँ है दिल्ली के कायस्थ संगठन और मेडिकल सेवा का दावा करने वाले लोग  इस पूरी घटना के स्याह पहलु ये भी है की बहुत छोटी संख्या में होने और कायस्थ सभा , भटनागर सभा जैसे तमाम सबसे ज्यदा संगठन होने के बाबजूद दिल्ली एनसीआर समेत पुरे देश में कायस्थ संगठनों का समाज के लोगो तक कोई सम्पर्क नहीं है I अधिकाँश संगठन सोशल मीडिया के जरिये ही अपनी ढपली अपना राग गा कर खुश रहते है , कोई सप्तऋषि घोषित कर रहा हा तो कोई २ महीने में एक बार किसी के लिए चंदा मांग कर मेडिकल हेल्प सम्राट बन जाता है I कोई ३० सालो से अपनी सेवा का ही दावा करते है लेकिन कितने ऐसे लोग समाज के असली ज़रूरत मंद लोगो तक कितने पहुँच पाते है ये एक बड़ी समस्या है लखनऊ की एक समाज सेवी पहले भी ऐसी खोखली मेडिकल सेवाओं पर अपना रोष जताते हुए कह चुकी है की क्या सिर्फ नॉएडा से उठी मीडिया हेल्प पर ही लोग पैसे देंगे या पुरे देश में कहीं और कोई काम ही नहीं कर रहा या फिर कहीं ये सिर्फ नाम को दिखाकर खुद को चमकाने का खेल मात्र है I समाज सेवा से ज्यदा इन नेताओं को इस बात में ज्यदा इंटरेस्ट होता है की किस पर कितना कर्जा है, किस ने किस से मदद ली है और उसको कैसे समाज में ज़लील किया जाये , इन्ही सब के चलते लोग एकाकी होना ज्यदा पसंद करते है विजातीय और सजातीय पर सवाल उठाने वाले नेताओं पर भी उठते सवाल  सवाल इस घटना में सजातीय शादी पर ही जोर दे रहे नेताओं और विजातीय पर लोगो को माँ बहन तक की गाली देने वाले पत्थरबाजों पर भी उठ रहे है I सजातीय शादी के समर्थको से ये सवाल क्यूँ नहीं पूछे जाने चाह्यी की क्या ऐसे ही लोग बिना शादी के एकाकीपन के शिकार होते रहे , कहाँ रह जाता है ये समाज और समाज के ऐसे ठेकेदार जब ऐसे लोग एकाकी हो कर अपना जीवन बिता रहे होते है I संगठनो से कायस्थ खबर की अपील  कायस्थ समाज के सभी संगठनों से कायस्थ खबर की एक ही अपील है की भले ही आप कोई कार्यक्रम कर पाए या नहीं पर व्हाट्स अप्प पर अपने लोगो को नेतागिरी की जगह समाज के इन असली ज़रुरात्मंदो तक पहुँचने की कोशिश करें I अगर आप अपने आसपास के कायस्थ समाज के लोगो को भी नहीं जानते तो कम से कम राष्ट्रीय और अन्तराष्ट्रीय तक होने के दावे ना करें I कायस्थ समाज को आप सब की ज़रूरत है लेकिन सबको साथ लाने के लिए दुसरो को अपशब्द या प्रताड़ित करने के लिए नहीं I अन्यथा ऐसे ही लोग आपसे कटे रहनेगे और आप सब लोग सोशल मीडिया पर अपनी अपनी ढपली बजाते रहेंगे

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