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चंदोली में महेंद्र पाण्डेय के पुनः जीतने पर बधाई पर अखिल भारतीय कायस्थ महासभा में विवाद, शैलेंद्र श्रीवास्तव पर झूठी खबर छपवाने के आरोप

कायस्थ खबर डेस्क I मुगलसराय में सांसद महेंद्र नाथ पाडेय के दुबारा जीतें को लेकर बधाई की बैठक की खबर को लेकर अखिल भारतीय कायस्थ महासभा में विवाद सामने आ गये है I ABKM मुगलसराय के जिला महामंत्री अभिषेक नरायण ने राष्ट्रीय मंत्री शैलेन्द्र श्रीवास्तव पर बिना आधिकारिक सुचना के लोकल अखबारों में फर्जी खबर छपवाने के आरोप लगाए है I बकौल अभिषेक उनकी पस्थिति में ऐसी कोई मीटिंग नहीं हुई I कायस्थ खबर उनके आये खंडन को नीचे दे रहा है आदरणीय शैलेंद्र श्रीवास्तव जी, राष्ट्रीय मंत्री अखिल भारतीय कायस्थ महासभा विगत 24 मई को आपके द्वारा प्रेषित एवं प्रकाशित की गई खबर को देखकर मैं बेहद ही अचंभित एवं दुखी हूं। इस खबर को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री सेवा न्यास, महासभा के सदस्यों एवं कतिपय स्थानीय नागरिकों ने शास्त्री आंदोलन को लेकर मेरी व महासभा की भूमिका पर संदेह व्यक्त करते हुए प्रश्न चिन्ह खड़ा किया है। एक लंबे अंतर्द्वंद के बाद मैंने इस पर अपना विरोध दर्ज कराना उचित समझा। मैं पूरी जिम्मेदारी से इस खबर का पूर्णता खंडन करता हूं। मैं आप, चंदौली जिला कार्यकारिणी, स्थानीय नागरिकों एवं ग्रुप के सभी सदस्यों को यह अवगत कराना चाहता हूं कि ना तो जिला कार्यकारिणी की ओर से इस तरह की कोई बैठक की गई है ना ही ऐसे किसी बैठक में मैं सम्मिलित हुआ हूं। राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री रविनंदन सहाय, राष्ट्रीय महामंत्री श्री अरुण श्रीवास्तव, प्रदेश महामंत्री श्री आरुणि चंद्र सिन्हा, प्रदेश उपाध्यक्ष श्री राकेश श्रीवास्तव आदि का ना ही उन दिनों मुगलसराय में आगमन हुआ है, ना ही इनके मुगलसराय आगमन के किसी भी प्रकार की सूचना मिली है। विगत 22 तारीख की रात्रि से अब तक ना तो आप से मेरी मुलाकात हुई है ना ही कोई बात हुई है। आप द्वारा प्रकाशित यह खबर पूर्णता असत्य है एवं इसकी मैं कड़े शब्दों में निंदा करता हूं। यह सर्वविदित है कि येन केन प्रकारेण आप खबरों में बने रहने की चाहत रखते हैं। बिना खबर के भी खबरों में बने रहने की कला में आप सिद्ध कौशल हैं। कभी-कभी ऐसा प्रतीत होता है कि शायद बिना बैठकों कार्यक्रमों के भी खबरें प्रकाशित करवाने के लिए आपको महासभा में विशेषाधिकार प्राप्त है। खैर जो भी हो मैं आप सहित सभी लोगों का ध्यान निम्न बिंदुओं पर आकर्षित करना चाहूंगा। ? पहला तो यह कि किसी भी संगठन में बैठक या कार्यक्रम की सूचनाओं का आदान-प्रदान एवं प्रेस विज्ञप्ति संप्रेषण हेतु महामंत्री या अध्यक्ष जिम्मेदार होते हैं। अगर किसी अन्य स्रोत से कोई खबर प्रकाशित होती है तो कार्यकारणी एवं सदस्यों में असमंजस एवं अविश्वास की स्थिति पैदा होती है। संगठन के पदाधिकारी इस प्रकार के विषय आने पर सूचना ना दिए जाने पर आपत्ति करते हैं तथा महामंत्री को ही उसके लिए जिम्मेदार मानते हैं। ऐसे में संगठन के प्रति लोगों में रुचि कम होती है जिससे संगठन का नुकसान होता है। पूर्व में भी आप द्वारा बिना बैठक या कार्यक्रम के प्रेस विज्ञप्ति जारी कर समाचार पत्रों में प्रकाशित किए जाने पर मैंने आपसे अनेकों बार व्यक्तिगत रूप से आपत्ति दर्ज की है। हर बार आप द्वारा आगे से ऐसा नहीं होने का आश्वासन दिया गया परंतु आप कभी भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आए। आप द्वारा प्रेषित अधिकांशतः समाचार बिना बैठक या कार्यक्रम के ही रहे हैं। ? दूसरा यह की शास्त्री जी यहां पैदा हुए, यही अपनी प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण की तथा स्वतंत्रा आंदोलन में महत्वपूर्ण भागीदारी करते हुए स्वतंत्रा पश्चात अपने योग्यता के बल पर देश के द्वितीय प्रधानमंत्री बने एवं देश का मान बढ़ाया। यह मुगलसराय के लोगों के लिए गर्व करने की बात है। मुगलसराय में लाल बहादुर शास्त्री जन्मस्थली को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने उसे संरक्षित एवं विकसित करने मुगलसराय शहर एवं स्टेशन का नाम लाल बहादुर शास्त्री के नाम पर रखने की मांग को लेकर पिछले 10-12 वर्षों से अखिल भारतीय कायस्थ महासभा, कायस्थ समाज, पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जन्मस्थली सेवा न्यास एवं कई स्थानीय संगठन आंदोलनरत हैं। सभी ने एकजुट होकर इस लड़ाई को लड़ा है। स्थानीय सांसद 2014 के चुनाव में शास्त्री जन्मस्थली पर आकर इन विषयों पर कार्य करने का भरोसा दिया परंतु चुनाव जीतने के बाद वह मुगलसराय शहर एवं स्टेशन का नाम लाल बहादुर शास्त्री के बजाय पंडित दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर करने का कार्य किया। जिसका उपरोक्त सभी संगठनों ने सांसद महोदय, उनकी पार्टी एवं उनकी सरकार का पुरजोर विरोध किया एवं उनके खिलाफ आंदोलनरत रहने का निर्णय लिया। जिसमें आपने भी हिस्सा लिया तथा सांसद महोदय का विरोध किया। इस लड़ाई के दरमियान आंदोलनकारियों को स्थानीय सांसद के इशारे पर प्रशासन एवं सरकार के अनेकों जुल्म सहने पड़े, उन्हें जेल व मुकदमा का भी सामना करना पड़ा। ऐसी परिस्थिति में शास्त्री जी के सम्मान की रक्षा के लिए आंदोलनरत किसी भी संगठन या व्यक्ति द्वारा उक्त सांसद के जीत पर खुशी व्यक्त करने का एवं उसे समाचार पत्रों में प्रेषित करने का कोई सवाल ही नहीं उठता। इन सबके बावजूद भी आपने ऐसा कार्य किया यह हम सबके समझ से परे है। आखिर आपकी ऐसी कौन सी मजबूरी थी? क्या आप किसी से भयभीत थे? या फिर आप किसी के द्वारा दिए गए लालच या लोभ मे फस गए? संदेह तो तब भी हुआ था जब पिछले आंदोलन में आपने अपनी सरकारी नौकरी का हवाला देते हुए जन्मस्थली पर आने से मना कर दिया था। जबकि पूर्व में आप बराबर हिस्सा लिए एवं सांसद व सरकार के खिलाफ बोलते रहे। खैर आपकी जो भी मजबूरी रही हो परंतु ऐसा करके आपने अपनी, महासभा एवं कायस्थ समाज की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है। ना सिर्फ आपने शास्त्री जी के सम्मान आंदोलनरत साथियों के साथ विश्वासघात करने का काम किया है बल्कि आपने शास्त्री जी का भी अपमान किया है। आप भले ही हवा के रुख के साथ, लहरों के साथ चलने में समझदारी समझते हुए अपने उसूलों से समझौता कर सकते हो। लालच और लोभ में अपना जमीर बेच सकते हो। परंतु मैं अपने वसूलओं, विचारों, सिद्धांतों पर अडिग रहने वाला व्यक्ति हूं। किसी भी कीमत पर मैं अपने जमीर से समझौता नहीं कर सकता। हवा के साथ बहना मेरी फितरत नहीं। जीवन पर्यंत शास्त्री जी के सम्मान की रक्षा के लिए शास्त्री जी का अपमान करने वालों के खिलाफ संघर्ष करता रहूंगा। कभी एकांतचित्त आत्ममनन करते हुए अपनेआप से सवाल करिएगा------ क्या ऐसा करके आपने शास्त्री जी का अपमान व अनादर नहीं किया है? क्या ऐसा करके आपने शास्त्री जी के सम्मान की रक्षा के लिए आंदोलनरत साथियों के साथ विश्वासघात एवं गद्दारी नहीं किया है? क्या ऐसा कर आपने महासभा व कायस्थ समाज की विश्वसनीयता को धूमिल नहीं किया है? क्या अपने निज स्वार्थ व लाभ के लिए महासभा के राष्ट्रीय, प्रांतीय व जनपदीय पदाधिकारियों के नाम का इस्तेमाल करना उचित है? निश्चय ही मेरे कटु शब्दों से आपको कष्ट पहुंचेगा। आपको होने वाले कष्ट के लिए मुझे खेद है। अभिषेक नारायण जिला महामंत्री, चंदौली अखिल भारतीय कायस्थ महासभा

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